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Sunday, April 2, 2017

घुसपैठिया: दिल्ली की मीटिंग में

स्पष्टीकरण


आप आगे की बात पढ़ना शुरू करें इससे पहले एक-दो बात साफ़ कर दी जाएँ तो अच्छा होगा| वैसे भी आजकल मानहानि के केस मिनटों में दर्ज हो जाते हैं| मान हो या न हो, बहरहाल हानि का खतरा सूंघते ही लोगों की पुलीस थानों की तरफ दौड़ने की कवायद शुरू होने में देर नहीं लगती| बात यह है - सुना था कि नेताओं के भाषण लिखने के लिए लोग किराए पर लिए जाते हैं| सोचा कि क्यों न लगे हाथ हम भी कुछ लिखैय्याओं को पकड़ें| मांस की दुकाने बंद होने लगीं तो कसाई बेरोजगार भी होने लगे| वे भले ही शील-स्वभाव से साहित्यिक न हों, लेकिन रिपोर्टर तो हो ही सकते हैं| इसके अलावा तमिलनाडु के कुछ किसान भी जंतर-मंतर से उठा लिए| वे भी स्टेलिन साहब के सान्निध्य में बैठे बैठे ऊबने लगे थे| उन्हें घुसपैठ करने की कोई औपचारिक ट्रेनिंग तो नहीं दे पाए लेकिन कुछ-एक नेताओं की जीवनी के खास-खास हिस्से और किस्से ज़रूर सुना दिए जिससे उन्हें यह पता हो कि क्या नहीं करना है| 

तो प्रस्तुत है पहले घुसपैठिये की रिपोर्ट -

घुसपैठिया तैयार है| थैले में दो सूखी रोटी और एक बोतल पानी रख कर निकल ही पड़ा| अप्रैल का महीना शुरू ही हुआ है, लेकिन सूर्य देवता ने अपनी पूरी तपन दिखानी शुरू कर दी है। लोगों को घर से बाहर निकलने में डर लगता है कि कहीं जल ना जाएँ। छुट्टियाँ भी शुरू हो गई है| बाहर निकलने में घुसपैठिये का डर थोड़ा अलहदा किस्म का है| ख़ाकी वर्दी का डर दिलो-दिमाग पर छाया तो सही पर फिर भी हिम्मत करके ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ की नजरों से छिपते-छिपाते, राह चलती माताओं-बहनों से दूरी बनाते किसी तरह से दिल्ली जा पहुँचा| दिल्ली जा पहुँचा तो पता लगा कि वहाँ तो एक दूसरा ही तमाशा चल रहा है| कोई और काम-धाम था नहीं तो सोचा कि चलो यही तमाशा देखा जाए| तमाशा शुरू ही हुआ था कि दर्शकों ने हल्ला मचाना शुरु कर दिया| दर्शकों ने  हो-हल्ला किया तो बाजीगर का ध्यान इस ओर गया| ध्यान से सुना तो पता लगा कि वहाँ तो एक दूसरे बड़े बाजीगर के नाम की चर्चा है| तमाशे में खलल पड़ा तो बाजीगर की त्योरियाँ चढ़ी| हाथ में लिए माइक को कसकर पकड़ लिया| खाँसी आई तो गले के मफलर का ध्यान आया| आज मफलर भी तो मफलर नहीं था बिलकुल गले का फंदा था|

पूरी ताकत से चीख कर कहने लगा कि मेरे तमाशे को देखो| अपने जीते जी मैं किसी और के तमाशे को यहाँ होने नहीं दूँगा| घुसपैठिया यह सुनते ही सीधे तमाशे वाली जगह के कागजात चैक करने के लिए भागा| पता चला कि वह जगह बाजीगर की नहीं थी| उसके खानदान में किसी की नहीं थी| चारों तरफ खड़े लोगों के आधार-कार्ड देखने पर जानकारी मिली कि खड़े हुए लोग भी उसके ज़रखरीद गुलाम नहीं थे| घुसपैठिया इस बात पर विचार कर ही रहा था कि किस हक़ से बाजीगर मीटिंग की जगह और वहाँ मौजूद लोगों पर अपना रुआब जता रहा है, बाजीगर ने कहना शुरू किया –

“मुझ से बड़ा कलाकार दुनिया में दूसरा न मिल पाएगा| मेरी सिफत इस बात से समझो कि मैं कैसे एक दर्शक की जेब से पैसा निकाल कर दूसरे की जेब में पहुँचा देता हूँ, कैसे एक की  थाली का खाना दूसरे की खाली में धर देता हूँ और मैं कैसे एक से घर खाली करा कर दूसरे को उसी घर में पहुँचा देता हूँ| तुम्हारी ज़िंदगी में रोशनी मेरे ही दम से है| मेरे ही दम से तुम्हारे खून में पानी की मिकदार बढ़ रही है|”

मीटिंग में फिर भी शोर-शराबा होता रहा तो उन्होंने समझाना शुरू किया – “मैं जम्हूरियत की सल्तनत के एक छोटे से टुकड़े का बादशाह हूँ| मेरी वजह से ही रिआया को रोटी मिलती है, पैसा मिलता है और घर मयस्सर होता है| इन तीनों तीनों चीज़ों को दिलाना मेरा काम है| जिसके पास से ये तीनों चीज़ें छिनी हैं उसका जिम्मेदार मैं नहीं हूँ| इसकी जिम्मेदारी तो बड़े वाले जादूगर की है| वह अपना काम नहीं कर पा रहा तो मैं क्या कर सकता हूँ? बड़ा बाजीगर बड़ा तमाशा दिखाता है जो आपके किसी काम का नहीं है| उसे देखने के लिए और उसका मजा लेने के लिए भी बड़ा ही होना पड़ता है| विश्वास मानो, चाहे कुछ हो जाए मैं आपको बड़ा होने नहीं दूँगा| जब बड़े होंगे ही नहीं तो बड़े जादूगर की बड़ी जादूगरी को देखेंगे कहाँ से? और अगर किसी तरह देख भी लेंगे तो समझेंगे कहाँ से?" 

"वे लोग निहायत बेवकूफ और मतलब-परस्त थे जो कहते थे अगर किसी का एक बार पेट भरना है उसे मछली दे दो और अगर उसका बार-बार पेट भरना है तो उसे मछली पकड़ना सिखा दो| नालायकों, अगर तुम्हें मछली पकड़ना सिखा दिया तो फिर तुम हमारे पंजे के नीचे रहोगे? हम दाता कैसे बनेंगे और तुम पाता कैसे बनोगे? हम एहसान करने वाले कैसे बनेंगे और तुम हमारे एहसानमंद कैसे बनोगे? हमारी बादशाहत ही खतरे में नहीं पड़ जाएगी क्या?”

घुसपैठिये ने बात का पूरा मतलब यह समझा कि माइक वाले बाजीगर का पूरा ध्यान बड़ी लकीर को छोटा करने के चक्कर में रहता है| अपनी छोटी लकीर को बड़ा करने के बारे में वह कोई विचार नहीं करता| माना कि जिस धंधे में ये लोग हैं उसमें गाल बजाना बहुत जरूरी होता है, लेकिन गाल बजाने का सही तरीका भी तो आना चाहिए –

बात चाहे बेसलीका हो मगर
बात कहने का सलीका चाहिए

दिल्ली की मीटिंग से आपका अपना,

घुसपैठिया


सन्दर्भ - https://khabar.ndtv.com/video/show/news/chanting-modi-modiin-arvind-kejriwals-meeting-453428

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