अपनी बात

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Saturday, March 11, 2017

होली से पहले होली

लो भाई, होली से पहले ही होली खिल गई!

बबुआ डिब्बे में बैठे हँस-हँस कर बतियाए तो रहे थे, लेकिन चेहरे पर फैला हुआ हार का रंग भी लगातार दिखाई देता रहा| हार का रंग क्या, बस यह समझ लीजिए कि साफ़-साफ़ दिखाई दे गया कि ‘अंगूर खट्टे’ वाली कहावत कैसे बनी होगी| भौजी तो उसी दिन से कोप-भवन में है जिस दिन देवरों की फ़ौज ने फागुन के पहले ही चुहल शुरू कर दी थी| पापाजी सिरे से गायब हैं| चचा लोग भी दिख नहीं रहे| कलकत्ता वाले अंकल जो एक ज़माने में गंगा किनारे वाले छोरे के साथ बहुत दिखाई दिया करते थे, बता रहे है कि नेता जी होते तो हार का अंतर थोड़ा कम हो जाता| ‘एक्सप्रेस हाई वे’ को ‘बुलेट ट्रेन’ ने निगला है या तीन तलाक के मामले पर ‘बुर्के’ ने अपनी ताकत दिखाई है, बहस का मुद्दा बना हुआ है| जो हो, लाल टोपी फीकी पड़ गयी है|

दूसरी ओर बहन जी उम्र बढ़ने के साथ मन-मस्तिष्क से कितनी परिपक्व हुईं, यह तो उनका ईश्वर ही जाने अलबत्ता उनका रिश्ता ज़रूर बड़ा हो गया है| नहीं समझे है क्या? अरे, बुआ जो हो गयी हैं| बुआ हो गईं तो हर काज-त्यौहार पर नेग की उम्मीद भी करने लगीं| बुआ-भतीजा पहले से पहले ही मिल-जुलकर जनता पर राज करने की योजना बनाने लगे| सूत न कपास, धूल में लट्ठम-लट्ठा| तो मैडम के चेहरे पर दिखाई दिया खिसियाहट का रंग| अच्छी तरह समझ में आ गया कि खिसियानी बिल्ली खम्भा कैसे नोचती है| नीले रंग का शेयर राजनीति के बाजार में लुढ़क गया है| हाथी का शिकार हो गया है| कुछ कह रहे हैं कि उसे शेरों ने मारा है, तो कुछ के हिसाब से भेड़ियों के झुण्ड ने|

सयाने ऐसा भी कह रहे हैं कि देवभूमि में रंगे सियारों ने ताकत दिखा दी है| शहर हो या जंगल, उन्हें नकारा नहीं जा सकता, यह बात सोलहों आने तय हो चुकी है| पता नहीं कि सच क्या है, वैसे रंग तो उनका भी उतरा जिन्होंने मशीन में सीडी और तीर्थ पर बरपी आपदा में टोपी घुमाई थी|

बाबा तो कहीं दिखाई ही नहीं दिए| गधे के सिर से सींग सा गायब होना क्या होता है, यह भी समझ में आ गया| बिल्ली के भाग से छींका कैसे टूटता है, यह बात कन्हैया की जन्मभूमि, चारधामों की पुण्यभूमि, फेनी के राज्य और आभूषणों के देश में नए हुक्मरानों की मार्फत और गेहूँ की डलिया में पुराने शासकों की मार्फ़त समझ में आ गई| चोर-चोर मौसेरे भाई का मुहावरा समझ में आया साथ ही यह भी समझ में आ गया कि किसी दिलजले ने ऐसा क्यों कहा था कि ‘काठ की हांडी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती’| बहानों, शिकायतों की टीस का रंग गालों की सुर्खी को ख़त्म किए दे रहा है|

प्रजातंत्र का उत्सव चल रहा है लेकिन सफलता पार्टियों की और पार्टियों के रहनुमाओं की बताई जा रही है| उधर केसरिया रंग के होली खिल रही है और इधर बेचारा आम आदमी इस उत्सव में अपना हिस्सा खोजने की जद्दोजहद में लगा है| बाजार से लाए गए गुलाल के डिब्बों में से सर्जीकल स्ट्राइक, नोटबंदी, राष्ट्रवाद, लोक-लुभावन योजनाएँ निकल रही हैं| लैपटॉप की दूकान लुट चुकी है| हरे रंग को इकट्ठा करने की कोशिश में लगे लोग भूल गए कि उनकी इस कोशिश से भगवा रंग भी एक जगह इकट्ठा हो रहा है| ‘चप्पा चप्पा भाजपा’ के नारे में तीन-तीन राज्यों में पंजे की बढ़त का रंग फीका सा हो गया है|

टीवी चैनलों पर बैठे संजय के कुछ कुछ अवतार सुरीले बोल बोल रहे हैं| और, कुछ फटे हुए ढोल अब भी सुबह से ऐंडी-भैंडी सी आवाज़ निकाले चले जा रहे हैं| दबे-कुचले-पराजित लोगों का एक स्वंभू और सेल्फ अपोइंटेड मसीहा मरी हुई सी एकसुरी-एकरस आवाज में अपने सिर के सफ़ेद बालों का वास्ता देकर दो-चार लंगड़े लस्त-पस्त हुड़दंगियों को अपनी बेताला आवाज पर बेतुका नाच नाचने को प्रेरित कर रहा है| उसकी भी गलती क्या है, तीन महीने से लगातार बजते-बजते आज आखिरकार उन सभी का करंट भी ख़त्म हो चुका है| समय की चाल को न परख पाने वाले ऐसे ही नालियों में लुढ़का करते हैं| कोई चिंता नहीं, यह भी होली का एक रंग ही है|

झाड़ू की बात भी हो जाए ज़रा! झाड़ू पर तो झाड़ू ही फिर गई| रोना, धरना, लापड़-झापड़, शिकवे-शिकायत सब रखे रह गए| नेता गलती करते हैं लेकिन जनता गलती नहीं दोहराती, साबित हो गया है|

रंगों के त्यौहार का मजा लीजिये| खुशी के जाम छलकाइए या गम ग़लत करने के लिए जाम उठाइए, कुछ भी कीजिए पर भरपूर मजा लीजिए|

होली की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ,

आपका अपना

अरविन्दनाभ शुक्ल

चित्र http://www.mazdoorbigul.net से साभार

6 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " बहादुर महिला, दंत चिकित्सक और कहानी में ट्विस्ट “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद!

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  2. रंग और कहावतों के नमूने सामने आ गए अच्छी होली हुई .

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    1. जी, धन्यवाद! आपकी टिप्पणी देखकर अच्छा लगा| आपके चिट्ठे पर भी यदा-कदा जाता रहता हूँ|

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  3. Very good narration of current political situation

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