अपनी बात

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Wednesday, November 11, 2015

शुभकामनाएँ

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
 
प्रिय मित्रों, अच्छा भोजन करते हुए, पटाखे फोड़ते हुए, उपहार लेते और देते हुए, घर को रोशनी से सजाते हुए और शुभाशंसाओं का आदान-प्रदान करते हुए उन सभी का ध्यान अपने मन से हटने दें जिन्हें आज भी खाना उपलब्ध होगा, जिनके घरों में आज भी उजाला होगा, जिन्हें कोई उपहार नहीं मिलता और जो उपहार देने में असमर्थ हैं, जो पटाखे बनाते हैं और जिनके लिए दीपावली कोई उम्मीद नहीं लाती|
 
हे मेरे ईश्वर, आज एक बार फिर सत्य की असत्य पर विजय हो! मानवीय चिंतन में जोड़ने की भावना को स्थान मिले और इस जोड़ने की भावना के लिए कीमत अपने सम्मान और अधिकार दूसरों को सौंप देने के रूप में न चुकानी पड़े| दूसरों के लिए न्याय पाने के लिए अपने ऊपर अन्याय न होने देना पड़े| मर्यादाएं खंडित न हों| विवेक न केवल मेरी चेतना का आधार बने बल्कि जन जन की चेतना इसी आधार पर खिले|
 
हे प्रभु, दुनिया का कोई भी मानव अपने विचार को प्रकट करने में संकोच न करे, भले ही वह विचार दूसरों के लिए कितना भी अप्रिय हो| तर्क के साथ साथ भावना का भी सम्मान हो| प्रत्येक व्यक्ति यह समझ ले कि तर्क अगर जीवन जीने की विधि को संचालित करता है तो भावना स्वयं जीवन ही है|
 
हे अन्तर्यामी, दुनिया जीने लायक बने और दुश्चिंताओं के कारणों का निवारण हो| मैं सम्पूर्ण शान्ति का वरदान नहीं माँगता| संपूर्ण शान्ति अकसर कमजोर को दबाकर ही होती है| लोगों में लड़ने की हिम्मत हो, लोग लड़ें किन्तु केवल सत्य की प्रतिष्ठा के लिए, न्याय की स्थापना के लिए और मानवीय मूल्यों के सम्मान के लिए|
 
खेतों में भरपूर अनाज हो, हाथों में काम हो, हृदय में उत्साह हो, सब सोच सकें, कह सकें, लड़ सकें – इसी प्रार्थना के साथ,

अरविन्दनाभ शुक्ल
 

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