अपनी बात

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Saturday, August 29, 2015

अखबार की कतरनों से

पिता अपनी बलात्कार-पीड़िता नौ साल की बेटी को इलाज के लिए रोज़ चार किलोमीटर गोदी में ले जाता है:

आज के समाचारपत्र में एक कोने में यह समाचार छपा देखा| पिता के जीवट पर शाबाशी देने का मन हुआ| पर, कुछ सवाल भी मन में कौंध गए| बलात्कार होते हैं, रोज़ होते हैं और हम उन घटनाओं को घटते देखने के इतने आदी हो गए हैं कि हम उन्हें रोजमर्रा के तमाशे की तरह ही देखने लगे हैं| बलात्कार ऐसी अखबारी खबर हो गया जो थोड़ी देर के लिए सनसनी पैदा करता है, मूंगफली चबाते हुए चर्चा का विषय बन जाता है, चौबारों – चबूतरों पर थोड़ी हलचल मचा देता है या बहुत हुआ तो एक्टिविट्स को थोड़ी देर के लिए काम – घंधा दे देता है| ऐसा क्यों क्यों होता है?

चित्र http://www.msn.com से साभार
पिता को रोज़ चार किलोमीटर अपनी गोदी में लादकर बिटिया को अस्पताल ले जाना पड़ता है| अस्पताल खुद चलकर उसके पास क्यों नहीं आ सकता? पिता के मजबूरी हो सकती है, उसका जीवट हो सकता है, प्रेम हो सकता है लेकिन हमारे लिए क्या है? समाचार? समाचार अखबारों के पास जाते हैं, छपते हैं और फिर बिकते हैं| बलात्कार भी बिकाऊ समाचार बन गया है| समाचारों की दूकान पर बिकने वाली एक जिन्स| विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार,  भारत में प्रत्येक चौवनवें मिनट में एक औरत बलात्कार का शिकार होती है| हर चौवनवें मिनट में हमारे माथे पर एक और धब्बा लग जाता है और हम क्या करते हैं? अखबार पढ़कर घर के कोने में डाल देते हैं और फिर सोचते हैं कि रद्दी किसे दी जाए? बाज़ार में रद्दी के दाम सबसे ज़्यादा कौन सा कबाड़ी देता है| फर्क केवल संवेदना का है, नज़रिए का है|

असाम में सात आतंकियों को मार गिराया गया:

आतंक को मार गिराना ही चाहिए, पर उन आतंकियों का क्या हो रहा है जो समाज की धमनियों में ख़ून के साथ बह रहे हैं? समाज के खून को सफ़ेद कर रहे हैं| एक ताजा रपट बताती हैं कि भारत में 2009 से 2011 के बीच करीब 68 हजार बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, लेकिन इस दौरान जेल की सजा सिर्फ 16 हजार दोषियों को ही हो सकी| उन्हें कब मार गिराया जाएगा? उन्हें मार गिराया जाये तो किसी बेबस पिता को अपनी बेटी को कंधे पर उठाकर रोज चार किलोमीटर चलकर अस्पताल नहीं ले जाना पड़ेगा| बचाव पक्ष यह तो कह देता है कि नाबालिग बलात्कारी की सुनवाई नाबालिग जस्टिस कोर्ट में हो लेकिन आज तक किसी भी सफाई पक्ष से यह यह नहीं सुना कि नाबालिग के साथ बलात्कार करने वाले के लिए किस विशेष सजा का प्रावधान हो|

 

दुनिया की सबसे लम्बी सुरंग बनाकर लगभग तैयार:

 

वह सुरंग कब बनेगी जो पिता की बेटी को सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचा पाएगी? सम्मान और सुरक्षा की गारंटी देगी| भारत में पिछले पांच वर्षों में बच्चों से बलात्कार के मामले एक सौ इक्यावन प्रतिशत बढ़े हैं| नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार 2010 में दर्ज 5,484 मामलों से बढ़कर यह संख्या 2014 में 13,766 हो गई है| यहाँ इस बात को भी समझ लेना चाहिए कि ये आंकड़े वास्तविक आंकड़ों से काफी कम हैं| बड़ी संख्या में ऐसी भी वारदात होती हैं जिनकी या तो रपट लिखाई नहीं जाती या जिनकी रपट लिखी ही नहीं जाती| वैसे भी आंकड़ों की बाजीगरी दिखाने में पुलीस और राज्य सरकारें उस्ताद हो चुकी हैं| हम पहाड़ खोद कर सुरंगें बनाने में लगे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वह सुरंग कब बनेगी जो ज़िंदगी को गरीब लड़की के पास लायेगी?

 

दिल्ली के अमन विहार से चोरी हुई नौ भैसों की तलाश में दस पुलिस वाले:

 

बस इस बात का इंतज़ार हैं कि पुलीस बलात्कारियों की तलाश में अपनी पूरी ताकत कब झोंकेगी| अव्वल तो आरोपी पकड़े नहीं जाते, पकड़े जाते भी हैं तो उनका सत्यापन नहीं होता| अधकचरी पुलिसिया प्रणाली केस इतना कमजोर बनाती है कि आरोपी को उचित सज़ा नहीं मिल पाती| पूरी व्यवस्था हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है| सड़कों पर कुछ दिन तमाशा होता है, संसद में ज़बानें चलती हैं और कागज़ पर पैन अपनी पूरी तेज़ी के साथ भागते हैं और चैनलों पर बहसें होतीं हैं और अंत में वही ढाक के तीन पात|

 

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